नई दिल्ली | 31 जुलाई 2026 केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के मामले में META की ग्लोबल टीम को तलब किया है। समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, सरकार कंपनी से एल्गोरिदम में पक्षपात (बायस), कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में उसकी जिम्मेदारी पर सवाल करेगी।
क्या है मामला?
यह विवाद उस फेसबुक पोस्ट से जुड़ा है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया था। पोस्ट पर अस्थायी रोक लगाए जाने के बाद META ने इसे तकनीकी खराबी बताया और माफी भी मांगी, लेकिन सरकार ने इस सफाई को पर्याप्त नहीं माना।
सरकार किन मुद्दों पर करेगी सवाल?
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क्या फेसबुक/इंस्टाग्राम के एल्गोरिदम में किसी प्रकार का पक्षपात है?
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कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम कैसे काम करता है?
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हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स पर कार्रवाई की प्रक्रिया क्या है?
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कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कंटेंट में META की जिम्मेदारी क्या है?
अगले हफ्ते भारत आ सकती है ग्लोबल टीम
सूत्रों के मुताबिक META की ग्लोबल टीम अगले सप्ताह भारत आ सकती है। कंपनी के अधिकारियों को सरकारी अधिकारियों के सामने पेश होने के साथ-साथ एक संसदीय समिति के समक्ष भी अपनी बात रखनी पड़ सकती है।
META ने क्या कहा?
META ने मंत्रालय को बताया है कि प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख खातों से पोस्ट किए गए कंटेंट की अतिरिक्त निगरानी की जाएगी। कंपनी ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों में किसी कार्रवाई से पहले कई स्तरों पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समीक्षा की जाएगी।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला केवल एक वीडियो हटाने तक सीमित नहीं है। इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पारदर्शिता, एल्गोरिदमिक निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ उनके संबंधों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सरकार यह जानना चाहती है कि बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स संवेदनशील और सार्वजनिक महत्व वाले कंटेंट पर किस आधार पर कार्रवाई करते हैं।
