रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। परीक्षा में गड़बड़ी की CBI जांच और परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 24 अगस्त 2026 को सुनवाई करेगा।
⚖️ याचिका में क्या मांग?
सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से दाखिल याचिका में परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है।
याचिका में खास तौर पर इन बिंदुओं की जांच की मांग उठाई गई है:
- प्रश्नपत्रों की सुरक्षा
- OMR शीट की कस्टडी
- OMR के मूल्यांकन की प्रक्रिया
- परीक्षा संचालन में कथित अनियमितताएं
- परीक्षा परिणाम की विश्वसनीयता
याचिकाकर्ता ने CBI जांच के अलावा सुप्रीम कोर्ट अथवा झारखंड से बाहर के किसी हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति बनाने का विकल्प भी सुझाया है।
🚨 OMR शीट को लेकर उठा सवाल
याचिका के मुताबिक, प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद एक सफल अभ्यर्थी की OMR शीट की कार्बन कॉपी वायरल हुई।
याचिका में दावा किया गया है कि संबंधित अभ्यर्थी ने पहले पेपर में 100 में से 48 प्रश्नों के उत्तर दिए थे, फिर भी उसे प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किया गया।
हालांकि ये याचिका में लगाए गए आरोप/दावे हैं और इनकी न्यायिक जांच अभी होनी है।
🔍 JPSC ने भी जांच का हवाला दिया
याचिका में JPSC के एक आधिकारिक नोटिस का उल्लेख किया गया है, जिसमें CID जांच जारी होने की बात कही गई थी।
आयोग ने सफल अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच पेपर-1 और पेपर-2 की OMR कार्बन कॉपी जमा करने को भी कहा था।
🏛️ अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
मामले की सुनवाई 24 अगस्त को होगी। सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह होगा कि परीक्षा में लगाए गए अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है या नहीं और याचिका में मांगी गई राहत पर क्या आदेश दिया जाए।
🎙️ ACTION BHARAT एंकर इंट्रो
“झारखंड की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गई है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच और परीक्षा दोबारा कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। याचिका में OMR शीट, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अब नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर हैं।”
