दिल्ली (Action Bharat) | 4 अगस्त को निजी स्लीपर बस में 16 वर्षीय किशोरी के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले में दिल्ली पुलिस ने बस चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच में DNA समेत फोरेंसिक साक्ष्यों को अहम कड़ी बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, किशोरी के कपड़ों और बस की सीटों से मिले जैविक नमूनों, बालों तथा अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों की जांच के आधार पर दोनों आरोपितों को मामले से जोड़ने में मदद मिली।
दोनों के खिलाफ POCSO Act की धारा 6 समेत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। आरोपपत्र में नाबालिग को गलत तरीके से बंधक बनाने और अपहरण से संबंधित प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
पुलिस ने 398 पन्नों की चार्जशीट 18 सितंबर को दाखिल की थी और 24 सितंबर को अदालत ने इसका संज्ञान लिया। पुलिस के मुताबिक, घटना के 48 दिनों के भीतर दाखिल आरोपपत्र में करीब 50 गवाहों को शामिल किया गया है।
बस से जुटाए गए कई फोरेंसिक नमूने
जांच के दौरान पुलिस ने बस की सीटों, स्टीयरिंग व्हील, चालक दल की सीट के पास रखे कंबल और गलियारे में बिछी बेडशीट समेत कई स्थानों से नमूने जुटाए। आरोपितों के घटना के समय पहने कपड़े भी जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए थे।
पुलिस ने बस के भीतर आरोपितों की मौजूदगी और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच में DNA और फिंगरप्रिंट जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों का इस्तेमाल किया।
बस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
चार्जशीट से सामने आए जांच संबंधी तथ्यों के अनुसार, बस पर 11 ट्रैफिक चालान लंबित थे। जांच में यह भी सामने आया कि बस का CCTV कैमरा काम नहीं कर रहा था और खिड़कियों पर भारी पर्दे लगे थे।
पुलिस ने बस पर दोनों आरोपितों की नियुक्ति के दौरान कथित रूप से पर्याप्त सत्यापन नहीं किए जाने की बात भी जांच में सामने आने की बताई है।
मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लिया था और दिल्ली, गौतम बुद्ध नगर तथा मैनपुरी पुलिस से जांच की स्थिति और पीड़िता को दिए गए मुआवजे की जानकारी मांगी थी।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया अदालत में चलेगी।
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