हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, CBI की जांच में अब तक 13 निजी व्यक्तियों की भूमिका सामने आई है। इनमें NTA द्वारा नियुक्त विषय विशेषज्ञ, कोचिंग सेंटर संचालक, बिचौलिए और अभ्यर्थी शामिल हैं।
पहली चार्जशीट में 13 लोगों के नाम
CBI ने 28 जुलाई को पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें तीन विषय विशेषज्ञों के नाम भी शामिल थे, जिन्हें NTA ने परीक्षा प्रक्रिया में नियुक्त किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन विशेषज्ञों को प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान संवेदनशील सवालों तक पहुंच मिली थी।
आरोप है कि केमिस्ट्री के प्रश्नों को कागज के टुकड़ों पर लिखकर बाहर ले जाया गया, जबकि अन्य विशेषज्ञों ने सवालों और उनके मापदंडों को याद करके दोबारा तैयार किया।
NTA अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
CBI अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच के दौरान सरकारी अधिकारियों और NTA पदाधिकारियों की संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि, परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की ओर से इस जांच पर सवाल उठाए गए हैं और NTA तथा शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
परीक्षा रद्द होने से लाखों अभ्यर्थी प्रभावित
पेपर लीक विवाद के बाद NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया था। इस घटनाक्रम ने देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
अब CBI की अंतिम चार्जशीट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पेपर लीक की साजिश में किन लोगों की भूमिका रही और जांच एजेंसी ने किन सबूतों के आधार पर अपनी जांच पूरी की।
नोट: चार्जशीट में नाम शामिल होना आरोप है, दोषसिद्धि नहीं। अंतिम फैसला अदालत द्वारा किया जाएगा।
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