चेन्नई/तिरुनेलवेली। तमिलनाडु की विशेष POCSO अदालत ने एक चर्च संचालक और उपदेशक एस. अब्राहम को चार नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराते हुए चार अलग-अलग मौत की सजाएं सुनाई हैं।
⚖️ अदालत ने क्यों सुनाई इतनी कठोर सजा?
अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने स्कूल की छुट्टियों के दौरान नीति शास्त्र और बाइबल की कक्षाओं के नाम पर बच्चियों को चर्च परिसर में बुलाया और उनके साथ यौन अपराध किया।
पीड़ित बच्चियों की उम्र 8, 12 और 13 वर्ष बताई गई है।
अदालत ने अपराध को “सबसे दुर्लभ” श्रेणी का माना और प्रत्येक पीड़िता से जुड़े अपराध के लिए अलग मौत की सजा सुनाई।
🚨 2022 में हुई थी गिरफ्तारी
मामला सामने आने के बाद पीड़ितों के माता-पिता की शिकायत पर 5 जुलाई 2022 को तिरुनेलवेली ग्रामीण महिला पुलिस ने अब्राहम को गिरफ्तार किया था।
अभियोजन के मुताबिक, आरोपी ने बच्चियों को घटना के बारे में किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।
💰 पीड़ितों के लिए मुआवजा
अदालत ने आरोपी पर ₹52,000 का सामूहिक जुर्माना लगाया।
साथ ही तमिलनाडु सरकार को चार पीड़ितों को ₹10-10 लाख की राहत देने का निर्देश दिया गया है।
⚠️ महत्वपूर्ण कानूनी बात
यह ट्रायल कोर्ट का फैसला है। भारत में मौत की सजा पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया लागू होती है और ऐसी सजा को उच्च न्यायालय की पुष्टि की आवश्यकता होती है। इसलिए इसे अंतिम रूप से लागू हुई सजा के रूप में नहीं बताया जाना चाहिए।
🎙️ ACTION BHARAT एंकर इंट्रो
“तमिलनाडु से बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामले में बेहद कड़ा अदालती फैसला सामने आया है। तिरुनेलवेली की विशेष POCSO अदालत ने चर्च संचालक एस. अब्राहम को चार नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराते हुए चार अलग-अलग मौत की सजाएं सुनाई हैं। अदालत ने अपराध को सबसे दुर्लभ श्रेणी का माना है। साथ ही पीड़ितों के लिए आर्थिक राहत का भी निर्देश दिया गया है। हालांकि मौत की सजा पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अभी बाकी है।”
