चंडीगढ़ में वित्त विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, डेपुटेशन और वेतन भुगतान की होगी जांच; कर्मचारियों को कार्रवाई की उम्मीद

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चंडीगढ़ (Action Bharat) | चंडीगढ़ प्रशासन के वित्त विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स यूटी कर्मचारी यूनियन ने विभाग के कामकाज की ऑडिट जांच कराने की मांग उठाई है। यूनियन ने डेपुटेशन पर कार्यरत कर्मचारियों की सेवा अवधि, एक्सटेंशन और उनके वेतन भुगतान में कथित अनियमितताओं सहित कर्मचारियों के वित्तीय लाभ रोके जाने का मुद्दा उठाया है।

इस मामले में यूनियन की शिकायत राष्ट्रपति भवन से चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद को भेजी गई है। शिकायत पर प्रशासन से मामले का समाधान और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। इसके बाद कर्मचारियों में उम्मीद जगी है कि लंबे समय से उठाए जा रहे सवालों की निष्पक्ष जांच हो सकती है।

डेपुटेशन पर काम कर रहे कर्मचारियों को लेकर सवाल

यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बाद दूसरे राज्यों से डेपुटेशन पर चंडीगढ़ आने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद सेवा जारी रखने के लिए संबंधित पेरेंट स्टेट और चंडीगढ़ प्रशासन से आवश्यक अनुमति या एक्सटेंशन लेना होता है।

कमेटी का आरोप है कि शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में कई कर्मचारी निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद कथित तौर पर बिना आवश्यक अनुमति के लंबे समय से चंडीगढ़ में सेवाएं दे रहे हैं।

यूनियन का कहना है कि कुछ डेपुटेशनिस्ट कर्मचारियों की ओर से पंजाब सेवा नियमों का हवाला दिया जा रहा है, जबकि चंडीगढ़ में सेवा जारी रखने के लिए आवश्यक प्रक्रिया और अनुमति का पालन किया जाना चाहिए।

बिना एक्सटेंशन वेतन जारी होने पर भी उठे सवाल

शिकायत में सबसे अहम सवाल यह उठाया गया है कि यदि कुछ कर्मचारियों की डेपुटेशन अवधि समाप्त हो चुकी थी और आवश्यक एक्सटेंशन नहीं लिया गया था, तो ऐसी स्थिति में भी उनका वेतन लगातार किस आधार पर जारी किया जाता रहा।

ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने इस पूरे मामले की वित्तीय और प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है। कमेटी का कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इससे प्रशासन के वित्तीय हित प्रभावित हो सकते हैं और सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

कर्मचारियों के वित्तीय लाभ रोकने का मामला भी उठा

यूनियन ने वित्त विभाग की ओर से कर्मचारियों को मिलने वाले कुछ वित्तीय लाभों को रोके जाने का मुद्दा भी उठाया है।

कमेटी के अनुसार कुछ लाभ कर्मचारियों को अदालत के निर्देशों के आधार पर मिल रहे थे, लेकिन बाद में वित्त विभाग ने इन लाभों को रोक दिया। वित्त विभाग की ओर से कथित तौर पर यह तर्क दिया गया कि संबंधित लाभ पंजाब सेवा नियमों के तहत दिए जा रहे थे, जबकि चंडीगढ़ में अलग सेवा नियम लागू होते हैं।

यूनियन ने मांग की है कि ऐसे मामलों की भी संबंधित नियमों और अदालत के आदेशों के आधार पर दोबारा समीक्षा की जाए, ताकि कर्मचारियों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।

4 सितंबर को धरना और पैदल मार्च

वित्त विभाग की कार्यप्रणाली के विरोध में ज्वाइंट एक्शन कमेटी की ओर से 4 सितंबर को धरना-प्रदर्शन और पैदल मार्च निकाला गया था। इसमें शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के अलावा प्रशासन से जुड़ी विभिन्न कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

प्रदर्शन के जरिए कर्मचारियों ने वित्त विभाग की कार्यप्रणाली और कथित नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच की मांग की थी।

इसके बाद 5 सितंबर को स्कूलों में कर्मचारियों ने ब्लैक डे मनाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

राष्ट्रपति भवन से शिकायत मुख्य सचिव को मार्क होने के बाद बढ़ी उम्मीद

कमेटी के प्रधान रणबीर राणा के अनुसार राष्ट्रपति भवन द्वारा शिकायत को चंडीगढ़ के मुख्य सचिव को भेजे जाने के बाद अब प्रशासन के सामने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की जिम्मेदारी है।

कर्मचारी संगठनों की मांग है कि डेपुटेशन, एक्सटेंशन, वेतन भुगतान और वित्तीय लाभ से जुड़े सभी मामलों के रिकॉर्ड की जांच की जाए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब कर्मचारियों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। यदि जांच शुरू होती है तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि डेपुटेशन पर कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं और वेतन भुगतान निर्धारित नियमों के अनुरूप हुए हैं या नहीं।

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